सृष्टि का शुभारम्भ

अनन्त शून्य
विलकुल खाली
कुछ नहीं था
कुछ भी नहीं
कोई भी नहीं।
जल – वायु.अग्नि
धरती – अंबर सूर्य और चाॅद
ग्रह – नक्षत्र कुछ नहीं।
जिसका ओर न कोई छोर
न कोई देव न कोई पत्थर
न दानव न मानव।
ब्रम्हाण्ड़ खाली था
निराकार
काल चक्र एकबार घुमा
और एक महाशक्ति का
अभिउदय हुआ।
नये सृष्टि का शुभारंभ
महाप्रलय के साथ
उत्पन आदिशक्ति
भुवनेश्वरी
हर रूप हर रंग में
एक प्रबलशक्ति स्वरूपा
संकल्प का साकार रूप
ब्रम्हा , विष्णुऔर महेश
आकार और प्रकार में
शगुन और निर्गुण
ओउमकार।
पुरूष भी स्त्री भी
रजगुण – सतगुणऔर तमगुण।
रजगुन ( ब्रम्हा ) ने
सृष्टि को रचा।
सरस्वती ने विस्तार किया
सतगुण ( विष्णु ) ने
कुछ काल के लिए
लक्ष्मी ने धन.वैभव दिये।
तमगुण (महेश ) ने
महाकाल.संहारक
पार्वती ( महेश्वरी )
पापनाशिनी
हमारी कर्मभूमि
हमारी यह धरती।
जिसमें हमारा जन्म हुआ
यही तो हमारा संसार है
यहीं पर जीना और मरना
भूत भविष्य और वर्तमान
यही तो सृष्टि है।
जीव – जन्तु
जलचर और नभचल
सृष्टि का शुभारंभ
आदि और अंत
परमात्मा का सार्थक रूप
निरंतर चलने वाला
यही तो सत्य है।

बी पी शर्मा बिन्दु

Writer Bindeshwar Prasad Sharma (Bindu)
D/O Birth 10.10.1963
Shivpuri jamuni chack Barh RS Patna (Bihar)
Pin Code 803214

8 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/07/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 23/07/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 23/07/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 23/07/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 23/07/2016
  3. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 23/07/2016
  4. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 23/07/2016

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