मजहब

मजहब ही जोडता है कई सरहदो को एक साथ।. दीवारे खडी कर दे दिलो मे वो नही हो सकती मजहब की बात।.
नही जीनकी कोई औकात खिलवाड करते वो मजहब के साथ।.
पसंद की कोई गुंजाईश नही होती मीलता है हर एक को ये पैदाईश के साथ।.
बेमतलब की है धर्मो की लडाई जीना आसां होगा समझदारी के साथ।. (अशफाक खोपेकर )

6 Comments

  1. सोनित 23/07/2016
  2. babucm babucm 23/07/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/07/2016
  4. mani mani 23/07/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 23/07/2016

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