NSG सदस्यता

भारत माँ की आंखों से,ख़ू के आंसू टपक रहे है,
फिर से छुरा घोप दिया,अंग अंग सब फड़क रहे है।

हिंदी चीनी भाई भाई का नारा देकर कितनी बार गिराया,
पाखंडी मुस्काता मन में,भारत वासी अब भड़क रहे है।

आतंकी मसूद अजहर को बचाया, वीटो पावर बटन दबाकर,
बेशर्मी की हद तोड़कर उल्टा घूरे,क्या पलकें झपक रहे है।

याद रहे चीनियों,हिंदी है हम,ये दंश झेल चुके है,
कितने आतंकी बचाओगे हर रोज यहाँ शूली पर लटक रहे है।

मेरे सैनिक शेरों के भुजबल से,कितना लोहा लोगें,
गीदड़ो की भाँति रोज मारते हम,चारों-खाने पटक रहे है।

पापियों को हथियार भेजते,उनके कंधों से बंदूक चलाते,
इसीलिए घड़ियाली आंसू बहाकर,आगे-पीछे फटक रहे है।

जानते है हम,नही चाहते तुम,शक्तिशाली बन जाए हिंदी,
पर रखते है अधिकार,काबिलियत,जिम्मेदारी,ना की झपट रहे है।

NSG सदस्यता आज नही तो कल,चौखट की शोभा होगी,
मगर जान गई दुनिया सारी, किसके कितने कपट रहे है।

मग़र बाहर से ज़्यादा,अंदर बैठे कपटी लोगो ने जशन मनाए,
मोदी मोदी गाकर विरोधी,देशहित को ही सटक रहे है।

भारत माँ कहती छोड़ो पापी और चीनी को सबसे पहले,
बाहर फेकों मेरे आँसुओ पर हँसकर,जमीं जो हड़प रहे है।

और अलख जगाओं ज्ञान की,समझदार बनकर ताकि,
दिखाए वो दिन,बहिस्कार करके,जब चीनी बौने तड़प रहे है।

___रवि यादव ‘अमेठीया’___
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7 Comments

    • Ravi Yadav Ravi Yadav 10/08/2016
  1. C.M. Sharma babucm 10/08/2016
    • Ravi Yadav Ravi Yadav 11/08/2016
      • C.M. Sharma babucm 11/08/2016
  2. mani mani 10/08/2016
    • Ravi Yadav Ravi Yadav 11/08/2016

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