शायद……सी.एम. शर्मा (बब्बू)….

दिल के दरीचों से आह निकलती है…
एक खिड़की पुरानी बंद सी पड़ी खुलती है….
रंग रोगन की पपड़ियों में दरारें सी पड़ चुकी हैं…
जैसे बारिश में भीगी सहमी सी खुलती है….
एक खिड़की पुरानी बंद सी पड़ी खुलती है….

पाट हैं के जरजर से झरते जाते हैं…
एक कुंडा है बस जो अभी भी लटका है …
शायद…. इंतज़ार में अटका है…
कभी आये कोई संवारने वाला…
शायद…..
ज़िन्दगी मेरी संभालने वाला…..
शायद……..
\
/सी.एम. शर्मा (बब्बू)….

22 Comments

    • babucm babucm 22/07/2016
  1. Kajalsoni 22/07/2016
    • babucm babucm 22/07/2016
  2. mani mani 22/07/2016
    • babucm babucm 22/07/2016
  3. Rajeev Gupta RAJEEV GUPTA 22/07/2016
    • babucm babucm 22/07/2016
  4. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 22/07/2016
    • babucm babucm 22/07/2016
    • babucm babucm 22/07/2016
  5. Rinki Raut Rinki Raut 22/07/2016
    • babucm babucm 23/07/2016
  6. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/07/2016
    • babucm babucm 23/07/2016
  7. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/07/2016
    • babucm babucm 23/07/2016
  8. kiran kapur gulati Kiran Kapur Gulatit 22/07/2016
    • babucm babucm 23/07/2016
  9. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 22/07/2016
    • babucm babucm 23/07/2016

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