हरियाली

पर्यावरण दिवस पर विशेष
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मरुस्थल हँस रहा हरियाली पर
कौवे की नज़र है हर डाली पर
एक अदना सा तरु कोंपलो
में सजधज कर
बाग रोशन करे कलियों के साथ हिलमिल कर
मुकुल मकरन्द छलकता अधर की प्याली पर
मरुस्थल हँस रहा …..

स्याह बादल को गुमा हो रहा
नियत नेकी ईमान खो रहा
इल्जाम पर इल्जाम
बागवा के माली पर
मरुस्थल हँस रहा …..

कनखी कुदरत ने सवारा कैसे
झुलसती लपटों के बीच उतारा कैसे
मनुजता तड़प उठी कुंज की बदहाली पर
मरुस्थल हँस रहा …

पाषाण की छाती को चीर कर उगने वाला
पताल भेद दरख्तों से रस पीने वाला
भरोसा कर नहीँ सका मानव मवाली पर
मरुस्थल हँस रहा हरियाली पर
कौवे की नज़र है हर डाली पर
!!
डॉ सी एल सिंह

9 Comments

  1. Kajalsoni 22/07/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 22/07/2016
  3. mani mani 22/07/2016
  4. Rajeev Gupta RAJEEV GUPTA 22/07/2016
  5. C.M. Sharma babucm 22/07/2016
  6. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/07/2016
  7. vijaykr811 vijaykr811 22/07/2016
  8. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/07/2016

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