बादल

बादल
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आसमान में होता है
बादल का जन्म

आसमान में जन्मा
रहता है सदा
आसमान में ही

नहीं उतरता
कभी ज़मीन पर

नहीं नहाता
नदी या ताल में

नहीं मापता
समुद्र की गहराई

नहीं भाती
फूलों की रंग—गंध

नहीं नाचता
मोरों को नाचते देखकर

नहीं फटता
रेगिस्तान की रेत पर

किया करता है
ऊँचे पहाड़ से ही दोस्ती

चूमा करता है
गिरिराज का मुख

रहना चाहता है
सदा आसमान में ही,
पर एक न एक दिन
आसमान में ही
हो जाता है
बादल का अंत भी

अंत में नहीं मिलता
दो गज़ आसमान
बादल को
आसमान में
दफ़न होने के लिए ǃǃ!
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—गुमनाम कवि (हिसार)
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