ज्ञान

ज्ञान
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ज्ञान एक समुद्र है
जल से लबालब भरा हुआ

प्यासा था मैं
प्यासे थे आप भी

मैं दो घूँट पी पाया
आपने पिये सौ घूँट

मेरी प्यास बुझी नहीं
आपकी प्यास का पता नहीं

मैं हूँ प्यासा
आप शायद तृप्त

मेरी प्यास
और आपकी तृप्ति
दोनों में जो फ़र्क़ है
वह आपकी नज़र में है

समुद्र की नज़र में
कोई फ़र्क़ नहीं !
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—गुमनाम कवि (हिसार)
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2 Comments

  1. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 22/07/2016
  2. Gumnam Kavi 25/07/2016

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