ब्रह्मांड का विस्तार

ब्रह्मांड का विस्तार
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हमारा सौरमंडल
बहुत छोटा है
आकाशगंगा में

हमारी आकाशगंगा में हैं
अरबों तारे, जिनके हैं
अपने अपने सौरमंडल

इस आकाशगंगा का
विस्तार माना गया है
लगभग एक लाख प्रकाशवर्ष,
किन्तु फिर भी यह है
ब्रह्मांड का छोटा सा ही भाग

इस ब्रह्मांड में हैं
अरबों आकाशगंगाएँ

ब्रह्मांड के विस्तार की
कल्पना है नितांत असंभव
और आदमी अपनी सोच में भी
शायद नहीं पहुँच पाया है
ब्रह्मांड से परे कहीं

जिस तरह
अरबों आकाशगंगाओं से
मिलकर बना है यह ब्रह्मांड
संभव है कि उसी तरह
अरबों ब्रह्माण्डों से
मिलकर बना हो
कोई बृहत् ब्रह्मांड

अरबों बृहत् ब्रह्मांडों से
मिलकर बना हो
कोई बृहत्तर ब्रह्मांड

अरबों बृहत्तर ब्रह्मांडों से
मिलकर बना हो
कोई बृहत्तम ब्रह्मांड
……………
……………

असंभव यह भी नहीं कि
ऐसा बृहत्तम ब्रह्मांड भी
परमेश्वर की सकल सृष्टि में
न हो धूल का एक कण भी ǃǃǃ
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— गुमनाम कवि (हिसार)
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