अजन्मा समय

अजन्मा समय
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एक एक करके
अभिलाषाएँ जन्म लेती गईं

एक एक करके
अभिलाषाएँ मरती चली गईं

अपनी मौत मर न पाईं,
जो अभिलाषाएँ
एक एक करके
आत्मघात करती चली गईं

बेरहमी से
मार दिया गया
उन शेष अभिलाषाओं को
जो अपनी मौत मर न पार्इं
या आत्मघात कर न पार्इं

वक्त के साथ नहीं रह पाईं
वे तमाम अभिलाषाएँ,
जिनकी हठ थी
कयामत का दिन देखने की

अभिलाषाओं का आना-जाना
कुछ और नहीं
बस अंत हुआ करता है
एक अजन्मे समय का ….ǃ
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-गुमनाम कवि (हिसार)
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6 Comments

  1. Kajalsoni 21/07/2016
    • Gumnam Kavi 21/07/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 22/07/2016
    • Gumnam Kavi 22/07/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/07/2016
    • Gumnam Kavi 25/07/2016

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