प्रकाश के स्रोत

प्रकाश के स्रोत
************************
प्रकाश जब
आगे से आता है
तब पीछे बनती है परछाई
और जब यह
पीछे से आता है
तब आगे बनती है परछाई

हमारी परछाई बनती है
क्योंकि
प्रकाश नहीं गुजर सकता
हमारे आरपार हो कर

हम पारदर्शी नहीं
इसलिए बाहरी स्रोत से
रोशन नहीं हो सकती
अंदर की दुनिया

हम प्रायः रहते हैं
बाहर की ही दुनिया में
और कभी
झाँक कर नहीं देखते कि
हमारे अंदर
प्रकाश है या अंधकार

जिन तत्वों से
यह सृष्टि बनी है
उन्हीं तत्वों से
बना है हमारा शरीर

प्रकाश के स्रोत
समान रूप से हैं
बाहर भी
अंदर भी

अपने भीतर
झाँककर देखिएगा

अंदर कमी नहीं
प्रकाश की
और इसके स्रोतों की
************************
– गुमनाम कवि (हिसार)
************************

6 Comments

  1. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 21/07/2016
    • Gumnam Kavi 22/07/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/07/2016
    • Gumnam Kavi 25/07/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 22/07/2016
    • Gumnam Kavi 25/07/2016

Leave a Reply