“मेरी तन्हाई “

हसरत थी मेरी, कि तुम्हे हंसा सकु ।

शिकवा नही कोई ,जो तुम्हे बता सकु ।

ताउम्र मोहब्बत करती रही,
तुम मुझसे ,

कह दो कि क्या दु तुम्हे , जो प्यार तुमसे निभा सकु ।।

(2 )
जिदंगी की ये भी अजब कहानी है ।

बेमौसम भी फिजा निराली है ।

दिल मे छुपी बात भी उन्हे बतानी है ।

कही कोई जख्म नही, फिर भी दर्द है गहरा

शायद खामोशी भी प्यार की इक निशानी है ।।

काजल सोनी

12 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/07/2016
    • Kajalsoni 22/07/2016
  2. babucm C.m.sharma(babbu) 22/07/2016
    • Kajalsoni 22/07/2016
  3. Gumnam Kavi 22/07/2016
    • Kajalsoni 22/07/2016
  4. mani mani 22/07/2016
    • Kajalsoni 22/07/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 22/07/2016
    • Kajalsoni 22/07/2016
    • Kajalsoni 22/07/2016

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