बैग

आजकल कल मै जब ,
कभी भी बाहर निकलतीं हूँ ,
तो जिस एक चीज पर,
मेरी निग़ाह अटक जाती है ,
” वह है बैग ”

स्कूल आने जाने वाले ,
बच्चों के कंधे पर लटका बैग ,
उनके उम्र और क्लास के हिसाब से,
कुछ ज्यादा ही ज्यादा भारी दिखता है।

युः तो हर बच्चा ही ,
अपनी सामर्थ्यानुसार ,
कमर तोड़ ,
मेहनत करता है।

मगर यह बैग ,
उनके कंधे ही नही,
बल्कि पीठ भी ,
नहीं छोड़ता है।

लगता है कि बच्चे बैग नहीं ,
अपने मां बाप के सपनोँ ,
और उम्मीदों का ही बोझ,
अपने कंधो पर उठाये घूम रहें हैं।

दूसरा, मुझे दिख जाता है ,
हर युवाओं के कंधे पर ,
लैपटॉप का बैग।

जिसका बोझ उन्होंने ,
कुछ ज्यादा ही ,
शान से ,
उठाया होता है।

जिसका वजन हमेशा
उनके अपने अपने ,
पोस्ट के हिसाब से ,
होता है।

अगर सीनियर पोजीशन है ,
तो महँगा वाला हलका लैपटॉप ,
अगर जूनियर पोजीशन है ,
तो सस्ता वाला भारी लैपटॉप।

लगता है कि वहअपने अपने ,
काम का बोझअपनी अपनी ,
पोस्ट के हिसाब से ,
उठाये घूम रहें हैं।

और तीसरा बैग जो मुझे ,
सबसे ज्यादा बेचैन करता है।
वह है कूरिअर बॉयज के कंधे पर,
लटका हुआ दो बक्सों जैसा भारी बैग।

और जो शादी और ,
त्यौहार के सीजन में ,
कुछ ज्यादा ही ,
भारी हो जाता है।

लगता है जैसे वह लडके ,
हमारी खुशियों का बोझ ,
अपने अपने कंधो पर ,
उठाये घूम रहें हैं।

एक जमाना था जब लोग ,
एक दूसरे के कंधे पर रख ,
रख कर बन्दुक चलाया करते थे ,
आजकल तो सीधा कंधो को ,
निशाना बना दिया गया है।

आजकल कभी कभी ,
ना जाने क्यों मुझे ?
ऐसा लगता है कि बैग ,
बैग नहीं,एटम बम है।

जिसके माध्यम से ,
पूरी की पूरी नस्ल के ,
कन्धों को उड़ाने की ,
साजिश चल रही है।

12 Comments

  1. mani mani 21/07/2016
    • Manjusha Manjusha 25/07/2016
    • Manjusha Manjusha 25/07/2016
  2. C.M. Sharma babucm 21/07/2016
    • Manjusha Manjusha 25/07/2016
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 21/07/2016
    • Manjusha Manjusha 25/07/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 21/07/2016
    • Manjusha Manjusha 25/07/2016
  5. Gumnam Kavi 21/07/2016
    • Manjusha Manjusha 25/07/2016

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