मेरे शब्द

मेरे शब्द

टूटे-ठबडे़
लंगड़े-बूढ़े
ऐसे हैं
ये शब्द हमारे
चलकर अपने पैरों पें
आएं हैं
ये पास तुम्हारे,
आंखे तेज हीन
लिए हुए ये
हाथ में टूटी-सी लकड़ी
लंगड़ाते-सरकते
गिरते-पड़ते
पहंुचे आखिर
द्वार तुम्हारे
टूटे-ठबडे़
लंगड़े-बूढ़े
ऐसे हैं
ये शब्द हमारे
इनको ऐसा जानकर
कभी ना दुतकारियेगा
कभी जो हो
इनसे खता
हाथ पकड़ न ताडि़येगा
एक दिन भविष्य में
आयेंगे ये काम तुम्हारे
टूटे-ठबडे़
लंगड़े-बूढ़े
ऐसे हैं
ये शब्द हमारे।
-ः0ः-

One Response

  1. Dr Chhote Lal Singh Dr Chhote Lal Singh 21/07/2016

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