थोड़ा वक्त …………..

थोड़ा वक्त मेरे साथ गुजार कभी,
माँ की तरह मुझे भी कर प्यार कभी.

मेरी बांहे भी तुझसे लिपटने को तरसती है
तू जो हों दुखी तो ये आँखे भी बरसती है.
सब कही टूट ना जाये ! इसलिए मैं रोता नहीं
तू जब देर से घर आता है तो बस ये आँखे बंद होती है,
सोता मैं भी नहीं जब तक तू सोता नहीं.

माना की तुझसे दूर रहां हूँ मैं
पर क्या खबर है तुझे ! कितना मजबूर रहां हूँ मैं.
त्योहार क्या होते है मैं भूल गया
जब मैं तुझसे, तेरी माँ से दूर गया.

अब आया हूँ लौट के तो तेरा सहारा चाहिए,
शाम हों चुकी है इस नाव को किनारा चाहिए.

है ये पल आखिरी ज़िन्दगी के
कभी ठीक , तो हूँ बीमार कभी
थोड़ा वक्त मेरे ……

father-son-walking

7 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/07/2016
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 20/07/2016
  3. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 20/07/2016
  4. mani mani 20/07/2016
  5. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 20/07/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 20/07/2016