मन की आँखें खोल – अनु महेश्वरी

मन की आँखें खोल रे बन्दे,
मन की आँखें खोल|

जो कुछ होए इस दुनियाँ में,
ईश्वर मर्ज़ी होए|
मन की आँखें खोल रे बन्दे,
मन की आँखें खोल|

फिर क्यों तू चिंता में डूबा,
जब बस में कुछ न है|
मन की आँखें खोल रे बन्दे,
मन की आँखें खोल|

अपना कर्म करले बन्दे,
जो जग में सुख होए|
मन की आँखें खोल रे बन्दे,
मन की आँखें खोल|

जो कुछ होए इस दुनियाँ में,
ईश्वर मर्ज़ी होए|
मन की आँखें खोल रे बन्दे,
मन की आँखें खोल|

न कोई ऊँचा न कोई निचा,
सब कोई एक समान|
मन की आँखें खोल रे बन्दे,
मन की आँखें खोल|

फ़िर क्यों भेद करे रे प्राणी,
सब को मान समान|
मन की आँखें खोल रे बन्दे,
मन की आँखें खोल|

जो कुछ होए इस दुनियाँ में,
ईश्वर मर्ज़ी होए|
मन की आँखें खोल रे बन्दे,
मन की आँखें खोल|

“अनु माहेश्वरी ”
चेन्नई

10 Comments

    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 21/07/2016
  1. mani mani 20/07/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 21/07/2016
  2. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 20/07/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 21/07/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 20/07/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 21/07/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/07/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 21/07/2016

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