शर्मंदगी …….

शर्मंदगी का दंश यूँ भी झेला जाता है कभी कभी,
जिसके नाम से सुर्खियों मे रखते है दुनिया वाले,
उनकी नजर अंदाजी का जलवा होता है इस तरह,
जैसे मिले हो वो किसी अजनबी से अभी अभी ।।





डी. के. निवातियाँ ________@@@

16 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/07/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/07/2016
  2. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 21/07/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/07/2016
  3. sarvajit singh sarvajit singh 21/07/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/07/2016
  4. C.M. Sharma babucm 21/07/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/07/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/07/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/07/2016
  5. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 21/07/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/07/2016
  6. mani mani 21/07/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/07/2016

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