गुरुजनों का जीवन

?गीत?
तर्ज: बबूल का ये घर आँगन दो दिन का ठिकाना है!!

गुरुजनों का जीवन तो पढ़ना और पढ़ाना है
आ गया जो गुरू शरण में उसको कुछ सिखाना है !!!

इनके दरबारो में ज्ञान की जले ज्योती
श्रद्धा से जो भी आ गया मिल गया उसे मोती
ज्ञान गुन की गंगा इनको ही बहाना है
गुरुजनों का जीवन तो पढना और पढ़ाना है!!

सदा इनकी बानी से बरसे अमृत धारा
इनके मेहनत से हो जगमग जग सारा
इनकी ज्ञान गरिमा को आगे ही बढाना है
गुरुजनों का जीवन तो पढ़ना और पढ़ाना है!!!

देश और धरम दोनो गुरुजनों के साये में
सुख शांति समता मिलती इनके छाये में
इनके ही आदर्शों को मिल हमें सजाना है
गुरुजनों का जीवन तो पढ़ना और पढ़ना है!!!

ज्ञान देने वाला तो कभी नहीँ मरता है
सूर्य चंद्र तारे की तरह रोशनी वो करता है
अच्छे सच्चे गुरुजन का बीड़ा तो उठाना है
गुरुजनो का जीवन तो पढ़ना और पढ़ाना है !!!!!!
!
!
??डॉ.सी.एल.सिंह??

10 Comments

    • Dr Chhote Lal Singh Dr Chhote Lal Singh 19/07/2016
  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 19/07/2016
    • Dr Chhote Lal Singh Dr Chhote Lal Singh 19/07/2016
  2. munshi prenchand uday 19/07/2016
  3. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 19/07/2016
  4. Dr Chhote Lal Singh Dr Chhote Lal Singh 19/07/2016
  5. Sukhmangal Singh sukhmangl 20/07/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 20/07/2016

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