जांबाज़

लोरियो मे सो रहा
जांबाज़ मेरा
थपकियों में सो रहा
सरताज मेरा.

छलकती हैं माँ की ममता
सीने में
बंद आँखो में छिपा
सुख साज मेरा
लोरियो में सो रहा ……

ख़त्म हो जाये अगर
नींद की घड़िया सुघर
खोलकर पलकें हँसे
माहताब मेरा
लोरियो में सो रहा ……

हसरतों की गर ये लम्हा
पूरी हों
लौटकर आयेगा वो
आवाज़ मेरा
लोरियो में सो रहा ……

हो सके मुमकिन तो
लब खोल दो
या समझ लूँ जा रहा
परवाज़ मेरा
लोरियो में सो रहा …….

एक जिगर का टुकड़ा
अपने
आन का मुरीद था
जाते जाते रख दिया
वो लाज मेरा.
लोरियो में सो रहा
जांबाज़ मेरा !!
!!
!!
डॉ.सी.एल.सिंह

6 Comments

  1. mani mani 19/07/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 19/07/2016
  3. babucm C.m.sharma(babbu) 19/07/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/07/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 20/07/2016

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