* उनकी चाहत *

उनसे बात हुई बहुत बार मुलाकात हुई
एक दूजे को जाना पहचाना
विचारों की आत्मसात हुई ,

वो बोली मैं कमसिन कली हूँ
आप हो उम्र दराज माहाबली
आप हम से बड़े हैं
आपके सम्मुख हम कैसे खड़े हो,

हमने कहा कोई बात नहीं
उम्र का कोई विसात नहीं
उम्र अपने साथ अनुभव लाती है
जो खुशियाँ सजाती है ,

फिर भी वो ईठलाती हैं
अपना कली होने का महिमा गाती हैं
भवरे को बुलातीह हैं
भवरे आएंगे जाएंगे क्या उस से आगे बढ़ पाएंगे,

आगे बात बढ़ाता हूँ
एक बार फिर समझाता हूँ
कली रहो या फूल बन जाओगे
नरेन्द्र को अपने साथ हर हाल में पाओगे।

7 Comments

  1. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 17/07/2016
  2. नरेन्द्र कुमार नरेन्द्र कुमार 17/07/2016
  3. नरेन्द्र कुमार नरेन्द्र कुमार 17/07/2016
    • नरेन्द्र कुमार नरेन्द्र कुमार 18/07/2016
      • नरेन्द्र कुमार नरेन्द्र कुमार 18/07/2016

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