वो बचपन – ऋचा यादव

आँख बंद कर ढूंढती हूँ ,
मैं तो अब मेरा वो बचपन .
मेरी उन धुंधली यादों में
है खिला – खिला सा वो बचपन .
जी लेती हूँ उन यादों को ,
सोच -सोचकर मैं तो अब बस .
मेरी वो यादें है ताज़ा ,
जिनमें दिखता मेरा वो बचपन .
पेड़ की उस घनी छाव में ,
खेलती मेरी वो दुनिया .
सोचती हूँ उस दुनिया को ,
जहां खेलता मेरा वो बचपन .
अब तो सब कुछ बदल गया है ,
उन यादों का अब कुछ बचा नहीं .
रह गयी अब यादें वो बनकर,
जिनमे रहता मेरा वो बचपन

14 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 16/07/2016
    • Richa Yadav Richa Yadav 17/07/2016
    • Richa Yadav Richa Yadav 17/07/2016
  2. mani mani 16/07/2016
    • Richa Yadav Richa Yadav 17/07/2016
    • Richa Yadav Richa Yadav 17/07/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 16/07/2016
    • Richa Yadav Richa Yadav 17/07/2016
  4. Dr Chhote Lal Singh Dr Chhote Lal Singh 16/07/2016
    • Richa Yadav Richa Yadav 17/07/2016
  5. sarvajit singh sarvajit singh 16/07/2016
    • Richa Yadav Richa Yadav 17/07/2016

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