कब आओगे

राह तकूँ मैं हर पल तेरी
कहो. कान्हा. कब आओगे
हो गयी सांझ. आ गयी बारी
क्या अब भी देर लगाओगे
तन भी अब तो डोल. रहा
मन भी जैसे बोल रहा
तुम तक पहुँच पाने. को
भेद जीवन. सब खोल रहा
कुछ. रस्ते देखे जाने. कैसे
सूंदर सपने. हों अपने. जैसे
आँख खुली तो सब झूठे थे
जाल माया. के. बड़े. अनूठे. थे
क्या क्या खोया. कुछ पाने को
पाकर. देखा. न. पाने. को
भेद है क्या समझ. न पाए
किउं आये हम इस दुनिआ में
अंत. जाना है जब तेरे चरणों में

16 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 16/07/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 16/07/2016
  2. सोनित 16/07/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 16/07/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/07/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 16/07/2016
  4. mani mani 16/07/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 16/07/2016
  5. sarvajit singh sarvajit singh 16/07/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 16/07/2016
  6. C.M. Sharma babucm 16/07/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 16/07/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 16/07/2016
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