कुदरत

पलक छपकते ही जिन्दगी बदल जाती ऐसा निजा़म है कूदरत का ।
आकर चले गये कई जान सका न कोई अब तक राज कूदरत का ।.
सुख दुख सब करनी का फल है बदनाम करता है इंसा नाम कुदरत का ।.
रिज्जक कम नही करता है वो पर नाशुक्रो को एक रुप दिखता है कूदरत का ।.
(अशफाक खोपेकर)

3 Comments

  1. babucm C.m.sharma(babbu) 16/07/2016
  2. mani mani 16/07/2016

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