आतंक का हमला

हर तरफ ही चीख है यह कैसा उपवन हुआ ।
कल तक तो शहर था आज वहशी वन हुआ ।
किसी के रोके नहीं रुकती दहाड़ें आज तो,
जिन्दा बचे उनका ही पहले मरने सा मन हुआ ।
हर तरफ कोलाहल और मची रही अफरा-तफरी,
एक बार फिर सरे बाज़ार घायल अमन हुआ ।
खुद की फिक्र छोड़कर कोशिशें पुरजोर कीं,
पर बाल जीवन का चाहकर न जतन हुआ ।
शव ही शव बिखरे पड़े, लहू से थे तर-बतर,
कौन जाने कब-कहाँ, मौत का आगमन हुआ ।

विजय कुमार सिंह
vijaykumarsinghblog.wordpress.com
Note : ब्लॉग पर तस्वीर के साथ देखें.

14 Comments

  1. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 15/07/2016
  2. सोनित 15/07/2016
  3. sarvajit singh sarvajit singh 15/07/2016
  4. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 16/07/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 16/07/2016
  6. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/07/2016

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