लड़की

मन की उदार है लकड़ी
तन की खुद्दार है लड़की
हृदय की हार है लड़की
कोमल सी उपहार है लड़की
घर को गुलज़ार है करती
आंगन की पुकार है लड़की
वेद और पुराण है लड़की
गीता और कुरान है लड़की
भावो की महान है लड़की
स्नेह की परिधान है लड़की
समाज की संचार है लड़की
प्रेम की सार है लड़की
फूलों का हार है लड़की
लक्ष्मी की अवतार है लड़की
शक्ति की वरदान है लड़की
गजलों की आवाज है लड़की
दिलो की सरताज है लड़की
स्वार्थ को इनकार है करती
निस्वार्थ की प्रकार है लड़की
सृष्टि की झनकार है लड़की
सृष्टि की सृजनकार है लड़की
समाज पे उपकार है लड़की
दर्द को दरकिनार है करती
खुशियाँ की त्योहार है लड़की
दिल से फनकार है लड़की
सब कुछ स्वीकार है करती
उमंगों की बहार है लड़की
आईने का श्रंगार है लड़की
जीवन की पर्याय है लड़की
फिर भी लाचार है लड़की
अनेकों अत्याचार है सहती
अबला सी पुकार है लड़की
समाज की दुत्कार है लड़की
नजरों की उपहास है लड़की
प्रयोग की प्रकार है लड़की
समाज की फटकार है लड़की
पुरुषों की अधिकार है लड़की
हुस्न की बाजार है लड़की
बिस्तर की साझेदार है लड़की
जननी नहीं औजार है लड़की
होती सदा तार तार है लड़की
बोझ की अंबार है लड़की
मरती बारंबार है लड़की
अस्मत हर बार है लूटती
फिर होती बेकार है लड़की
कूड़े के भंडार मे पड़ती
खेतों खलिहान मे मिलती
तेजाब के प्रहार है सहती
रस्सी की पुकार है लड़की
मृत्यु की उपहार है लड़की
नहीं कहीं स्वीकार है लड़की
सभी के विचार है कहती
इसी की हकदार है लड़की
लड़की ये लड़की
इसी की हकदार है लड़की ।।

2 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 15/07/2016

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