हँसी—- श्रीजा कुमारी

खिल जाती हो जो तुम होठों पे ऐ हंसी
ख़ूबसूरती में चार चाँद लग जाते हैं
चाहे कुछ भी हो मुकद्दर में
पर दिल में अरमान भर जाते हैं……..

ऐ हंसी आ जा तू मेरे पास
ताकि न बह पायें आंसू ग़मों के
खुशियाँ बिखेर दो होठों पे ऐसे
पोंछ जाना आंसू माँ का आँचल बनके…….

पंछियों सा गुनगुनाना है मुझे
उड़ना है नीले गगन पे
आ जाओ तुम ऐसे बन-ठन के
की पुरे हो जाए सारे अरमान इस दिल के……

ऐ हंसी तू हंसाती रहना तेरे आगे आंसू क्या चीज है
तेरे लुटेरे है चारो तरफ पर उनसे लड़ने की हिम्मत भी तो तुमने ही दी है…….

6 Comments

  1. mani mani 14/07/2016
    • shrija kumari shrija kumari 14/07/2016
  2. babucm babucm 14/07/2016
    • shrija kumari shrija kumari 14/07/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 14/07/2016
    • shrija kumari shrija kumari 14/07/2016

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