और घर में बन्दर छोड़ चले..

तुम दिल क्यूँ मेरा तोड़ चले..
आँखों में समंदर छोड़ चले..
दिल को थी कहाँ उम्मीद-ए-वफ़ा..
यादों का बवंडर छोड़ चले.. 😐

न पूछो कैसा किया सितम..
जो दिल से अपने निकाल दिया..
खुद को भी उठाकर ले जाते..
इस दिल के अंदर छोड़ चले.. 😛

ना जाग सकूं ना सोता हूँ..
हर वक़्त परीशाँ होता हूँ..
आए थे मदारी बनकर तुम..
और घर में बन्दर छोड़ चले.. 😀

– सोनित

6 Comments

  1. mani mani 13/07/2016
  2. babucm C.m.sharma(babbu) 13/07/2016
  3. sarvajit singh sarvajit singh 14/07/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/07/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 14/07/2016

Leave a Reply