रचना…………मनिंदर सिंह “मनी”

आओ मिलकर नया समाज बनाए,
नफरत की लौ बुझाकर,
प्यार का दीप जलाए,
हर धर्म से पहले इंसानियत को,
अपनी पहचान बनाए,
किसी रोते हुए को हँसा,
भूखे की भूख मिटा,
नंगे तन को कपडे से ढक जाये,
मंदिर, मस्जिद, गुरुदुवारे, चर्च,
बहुत बना लिए,
कही अस्प्ताल, स्कूल,
बेघरों के लिए सराये बनवाए,
अपनी आय से दसवा हिस्सा,
जरूर निकाले, आपकी बचत,
किसी जरूरत मंद की ख़ुशी बन जाये,
उम्मीद है मुझे, देंगे आप साथ मेरा,
बदलेंगे इस देश के हालातो को,
समझेंगे मेरे जज्बातो को,
पर डर भी है मुझे कही ना कही,
मेरे लिखे लफ्ज़,
बेहतरीन, लाजवाब, ख़ूबसूरत,
“मनी” की रचना बन ना रह जाये |

16 Comments

    • mani mani 13/07/2016
    • mani mani 13/07/2016
  1. C.M. Sharma babucm 13/07/2016
    • mani mani 13/07/2016
  2. सोनित 13/07/2016
    • mani mani 13/07/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 13/07/2016
    • mani mani 14/07/2016
  4. sarvajit singh sarvajit singh 13/07/2016
    • mani mani 14/07/2016
  5. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 14/07/2016
    • mani mani 14/07/2016
  6. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/07/2016
  7. mani mani 14/07/2016

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