न करो

रेगिस्तान में फूलों की
तमन्ना न करो
गिरती दीवारों. के तले
आशियाँ न करो
वीरान वादियों में
बहारों की तमन्ना न करो
सहरअं में बहें. झरने ,
ऐसी फ़िज़ूल बातों की चाहत
तुन हरगिज़. न करो
दिए तूफानों में जला करते नहीं
तेज़ आंधियों मे क्या वज़ूद उनका
उम्मीद उनके जलने की
तुम हगीज नकरो

8 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/07/2016
  2. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 12/07/2016
  3. sarvajit singh sarvajit singh 12/07/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 13/07/2016
  4. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 12/07/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 13/07/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 13/07/2016

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