गुलों को शाख पर ही रहने दो

गिराओ न बिजलियाँ
गुलों को शाख पर ही रहने दो
काँटों की गोद में खिली हैं लेकिन
वदिओं में रंग. और. खुशबु बहने दो
कुदरत का करिश्मा. है नज़ाकत इनकी
फिर भी. सहती हैं सब इन्हें सहने दो
तेज़ हवा के झोंके इन्हे लहरा जाएँ
कहाँ भांवरों से मगर ये बच पाएं
छल कपट से मासूमियत को जो छल जाएँ
केहदो उनसे गिराओ न बिजलियाँ
गुलों को शाख पर ही रहने दो

9 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/07/2016
  2. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 12/07/2016
  3. sarvajit singh sarvajit singh 12/07/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 13/07/2016
  4. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 12/07/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 13/07/2016
  5. Vivek Singh Vivek Singh 13/07/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 13/07/2016

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