तजुर्बा………..मनिंदर सिंह “मनी”

मैं झूठ के टीले बैठा बना | 18
अपने हाथों मुश्किलों को कमा ||

ना होता मुझ से किसी को दिखा |
ना ही होता मुझसे झुठलाना ||

मंजिल की चाह इक दिल में जगा |
मन मर्जी उलटे राहों पर जा ||

ना मुझसे होता वापिस आना |
ना हो पाता अब आगे बढ़ना ||

यारों घर से हो न निकलना |
ना मुमकिन घर में उम्र गुजरना |

धीरे धीरे गर क़दम बढ़ाता |
कोई मुकाम हासिल कर पाता |

जीवन ने दिया तजुर्बा ऐसा |
मुझसे न बता, न छिपा हो पाता |

मनिंदर सिंह “मनी”

14 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 12/07/2016
    • mani mani 12/07/2016
  2. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 12/07/2016
    • mani mani 12/07/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/07/2016
    • mani mani 12/07/2016
    • mani mani 12/07/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/07/2016
    • mani mani 12/07/2016
    • mani mani 12/07/2016
  5. sarvajit singh sarvajit singh 12/07/2016
    • mani mani 12/07/2016

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