प्रेम

खूब चलीं चौपाल पर बतियाँ,
लिखती-फटती हर इक पतियाँ,
ठिठोली करती हैं सब सखियाँ,
काटे नहीं कटती हैं रतियाँ।

विजय कुमार सिंह
vijaykumarsinghblog.wordpress.com

14 Comments

  1. Atit rai 12/07/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/07/2016
  3. C.M. Sharma babucm 12/07/2016
  4. mani mani 12/07/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/07/2016
  6. sarvajit singh sarvajit singh 12/07/2016

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