वह

वह भी चाहती है
निडर होकर रहना
आनंद के साथ टहलना -देोड़ना
उस माटी पर
जाँहा धरती को
माँ कहा जाता है
पेड़ -पेोधों, नदि -नालों
और पत्थरों को
देवता के नाम पर पूजते है

वह भी चहती है
बड़ा आदमी बनना
पर उसकी हत्या न हो
माँ की गर्भ में ही
वह छुट्कारा पाना चाहती है
उस डर से
जो उसे मिला है
धरती पर पैर रखने से पहले ही

वह भी उड़ सकती है
अनंत नीले आसमान में
पर, उसे न मिले डर
उन काले नागों का
जो धीरे -धीरे
बढ़ रहे है करीब
क्योंकि वह एक लड़की है.

2 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 12/07/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/07/2016

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