बॉर्डर आउट पोस्ट

आना कभी बार्डर तुमको बीएसएफ दिखाता हूँ…..

आँखों के आइनों से कुछ नया दिखाता हूँ,
आना कभी मेरी बीओपी आपको बीएसएफ दिखाता हूँ।

संतरी के अन्दर छुपे डर को बताता हूँ,
संगीनो के साये में असुरक्षित वर्दी दिखाता हूँ।

रोजनामचे के पन्नो पर लिखी इबारत बताता हूँ,
गुलामी की अनकही गाथा सुनाता हूँ।

ड्यूटी करने के कुछ परीणाम बताता हूँ,
अमित नाथ और प्रमाणिक की बात बताता हूँ।

आतंक और अपराधी को मारने का अंजाम बताता हूँ,
सलाखों में कैद निर्दोष खाकी दिखाता हूँ।

खून पसीने से सींची वर्दी पर खादी की तोहमत बताता हूँ,
आना कभी मेरी बीओपी आपको बीएसएफ दिखाता हूँ।

बारीश में बार्डर पर भीगते जवान। बताता हूँ,
एसीपी में खून सनी वर्दी में जवान दिखाता हूँ।

माँ बाप बच्चो से मिलने को तरसता इंसान बताता हूँ,
आँखों में पीते अश्रु और मुस्कुराता जांबाज दिखाता हूँ।

बेहाल अन्दर से टुटता फौलाद बताता हूँ,
तेरी आँखे नम ना हो जाए वो दास्ताँ सुनाता हूँ।

छुट्टी के लिए गिडगिड़ाता लाचार बताता हूँ,
बेल्ट में कैद एक चकनाचूर आदमी दिखाता हूँ।

आना कभी मेरी बीओपी आपको बीएसएफ दिखाता हूँ।

5 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/07/2016
  2. babucm babucm 12/07/2016
  3. mani mani 12/07/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/07/2016

Leave a Reply