लड़की गरीब घर की

लड़की गरीब घर की
है जल की मछली जैसी
और मछली गरीबी नामक
फंदा देखती है स्वप्न मे

मानना नहीं चाहती हार
और पढ़ना -लिखना चाहती है
प्रकाश की डगर पर बढ़ना चाहती है
आगे की ओर, अस्थिर पानी केा चिर कर

वक्त नाम की माँझी
इन्तजार में है फंदा लेकर
मछली फंदा में फंसकर
हार मान ही लेती है
उसकी रंगीन स्वप्न भी
पूरा तहस -नहस
हो जाती है.

3 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 12/07/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/07/2016

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