नन्ही चिड़िया : बाल कविता

ताटंक छंद
प्रथम पंक्ति -16
द्वितीय पंक्ति 14
पदान्त मे 3 गुरु

मेरे आँगन में इक चिड़िया
चीं-चीं करती आती है।
पंचम सुर में गीत सुनाकर
मुझको रोज जगाती है।।

फुदक फुदक कर चलना उसका
मेरे मन को भाता है।
पकड़ पास मै उसको रख लूँ,
मेरा जी ललचाता है।।

कहने को है नन्ही मुन्नी,
लेकिन बहुत सताती है।
जब भी हाथ बढ़ाता हूँ मै
फुर से उड़ जाती है।।

पिजड़े में न रहना चाहे,
नीले नभ की रानी है।
आजादी अनमोल जगत मे
सिखाती बात सयानी है।।
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सुरेन्द्र नाथ सिंह “कुशक्षत्रप”

15 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/07/2016
  2. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 12/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/07/2016
  3. sarvajit singh sarvajit singh 12/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/07/2016
  4. mani mani 12/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/07/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 18/07/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 18/07/2016
  7. Anju Singh 22/09/2016

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