|| मानवता प्रेमी ||

डा कलाम

गीता कहती इस जग में, मनुष्य की दो ही जाति हैं |
इक मानव दूजा दानव, अन्य न गतियॉं प्राप्त हैं ||1||
दैवी सम्पदा से पूर्ण मनुज ही, जग में मानव कहलाता है |
अहंकार बल दर्प से प्राणी, असुर योनि को पाता है ||2||
मनुष्यत्व प्राप्त कर पाया, जो जग में क्या उसे अप्राप्त है |
शेष लक्ष्य क्या बचा जगत में, सब तो उसमें व्याप्त है ||3||
ऐसा ही मानव हमनें खोया, जो मानवता से परिपूर्ण था |
दैवी सम्पद का वास था जिसमें, मानवता से भरपूर था ||4||
वह मानव था बस मानव था, था मानवता का पुजारी |
वह जाति धर्म से ऊपर था, था मानव प्रेमी व्रतधारी ||5||
देश का था सच्चा सपूत, था मानवजाति से उसे प्रेम |
करूणा जिसमें बसती थी, था मनुष्यत्व से जिसे प्रेम ||6 ||
विज्ञान था जीवन उसका, गीता भी उसको अतिप्रिय थी |
कुरान भी खूब समझता था, बाइबिल में भी उसकी रुचि थी ||7||
सम्राट समान हो कर भी, जो बस मानव ही बना रहा |
सामंती प्रथाएं तोड़ सभी, विकास पथ पर ही डटा रहा ||8||
राजसिंहासन पर बैठ कर भी, जनता को उसने अपनाया |
जनता का राजा बनकर ही, सबका प्रिय वह बन पाया ||9||
विज्ञान का ज्ञान तो बांटा ही, करुणा भी खूब बरसाई |
भावी पीढ़ी की आशा बनकर , ज्योति पंथ पर बिखराई ||10||
भावी पीढ़ी में ही, कल का भविष्य उसे साकार दिखा |
इन्हीं पुष्पों के विकास से, कल का भविष्य विस्तार दिखा||11||
श्वासों का जब तक साथ रहा, ज्ञान की गंगा बहाई |
जीवन का साथ भी तब छूटा, जब ज्ञान ज्योति थी बिखराई ||12||
ऐसे अतुल्य मानव चला जगत से, पर आँसू हम न बहाएंगे |
उसके स्वप्नों को दे उड़ान, भारत के भाग जगाएंगे ||13||

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/07/2016
    • अखिलेश प्रकाश श्रीवास्तव aklesh1960 15/07/2016
    • अखिलेश प्रकाश श्रीवास्तव aklesh1960 15/07/2016

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