वो भी तन्हा…….मनिंदर सिंह “मनी”

हर रोज चाँद से मुलाकत,
वो भी तन्हा, मैँ भी तन्हा,
करोडो की भीड़ में, हर पल,
गुजर रहा दोनों का,
वो भी तन्हा, मैँ भी तन्हा,
दिन के उजाले गुजर जाते है,
तलाशते खुद को, फिर,
वो भी तन्हा, मैँ भी तन्हा,
दिल बहला लेते है, चांदनी रातों में,
गुफ्तगू एक दूसरे से कर,
अमावस की काली रात में,
वो भी तन्हा, मैँ भी तन्हा,
हवाएं ले आती है बादलों को,
जाने कहाँ से ?,
तलाशती नज़रे एक दूसरे को,
वो भी तन्हा, मैँ भी तन्हा,
बरस पड़ते है बादल भी,
देख दोनों की तड़प,
होती ढेर सारी बातें हर रात,
वो भी तन्हा, मैँ भी तन्हा,

12 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 11/07/2016
    • mani mani 11/07/2016
    • mani mani 12/07/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/07/2016
    • mani mani 12/07/2016
  3. आदित्‍य 11/07/2016
    • mani mani 12/07/2016
  4. sarvajit singh sarvajit singh 11/07/2016
    • mani mani 12/07/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/07/2016
    • mani mani 12/07/2016

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