ऐ “माँ”…………मनिंदर सिंह “मनी”

मजा था हर आने वाले पल में,
मुस्कुराकर निकल रही थी जिंदगी,
बदला वक्त, लगा रुक सा गया,
ख़ुशी को गमी में बदलने लगी जिंदगी,
मुश्किलों को हर रोज नए नए चेहरे लिए,
बेवक्त, बेवजह मिलाने लगी जिंदगी,
फिर हुआ कुछ ऐसा, उम्मीद से जो परे था,
जदोजहद करने लगी, मेरी माँ पाने को जिंदगी,
ब्रेन हैमरेज बना बहाना, मौत को,
मेरी माँ से मिलाने ले आई जिंदगी,
सात दिन, कभी यहाँ, कभी वहां,
हर किसी से उम्मीद बांधने लगी जिंदगी,
अपने दूर हो गए, जान कर सब कुछ,
उम्र से पहले मुझे बड़ा करने लगी जिंदगी,
तंगहाली ने ओढ़ ली थी, बेबसी की चादर,
इम्तिहान पर इम्तिहान लेने लगी जिंदगी,
मैँ मेरे पिता, मेरी दो बहनो की दुआओ की,
वक्त के आगे कोई कदर पा ना सकी जिंदगी,
अढ़ाई बजे थे दोपहर के, देहली से फ़ोन आया,
आ रहे हम वापिस बचा ना सके जिंदगी,
सिर्फ अश्रु आँखों में, हाथो में माँ का शरीर,
माफ़ करना ऐ “माँ” तुझे दे ना सके जिंदगी,

12 Comments

  1. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 11/07/2016
    • mani mani 11/07/2016
    • mani mani 11/07/2016
    • mani mani 11/07/2016
  2. babucm babucm 11/07/2016
  3. mani mani 11/07/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 11/07/2016
    • mani mani 11/07/2016
  5. sarvajit singh sarvajit singh 11/07/2016
    • mani mani 12/07/2016

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