==* कैसे कह दे की बावफा है जिंदगी *==

अब ना उम्मीद-ए-वफा है जिंदगी !
जानें क्यों मुझसे खफा है जिंदगी !!

यूँ तो शिकायत नही अब किसी से !
अपने ही वजुद से जफा है जिंदगी !!

बाँधे हमेशा झूठे सपनो के पुलिंदे !
महफिल से अपने दफा है जिंदगी !!

दिख रहे है सबको आब-ए-चश्म !
बे जुर्म कहूँ या बेवफा है जिंदगी !!

फ़ुऱ्कत मे कटे रात दिन ‘शशी’ के !
कैसे कह दे की बावफा है जिंदगी !!
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शशिकांत शांडिले, नागपूर
भ्र. ९९७५९९५४५०
Kaise Kahde ki....

5 Comments

  1. mani mani 11/07/2016
  2. babucm babucm 11/07/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 11/07/2016
  4. शशिकांत शांडिले SD 12/07/2016

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