क्या खोया-क्या पाया

एक-ओर उजाला छाया हैं एक-ओर बरसता साया हैं !
तुमने मुझको खोया-सो-खोया मैंने तो तुमको पाया हैं !!

गैरो की बातों में आकर तेरा मुझको प्रतिकार मिला !
सब था स्वीकार मोहब्बत में मेरा तुझको अधिकार मिला !
तुम छोड़ रहे बेशक दामन मैंने तो दिल में बसाया है !
तुमने मुझको खोया-सो-खोया मैंने तो तुमको पाया हैं !!

बिखरी रातों को जोड़-जोड़ कागज पर जब मैं लिखता हूँ !
खुद अनगाया सा लगता हूँ बेशक़ दुनिया में बिकता हूँ !
तुम पर लिखे गीतों से मैंने अक्सर मन बहलाया हैं !
तुमने मुझको खोया-सो-खोया मैंने तो तुमको पाया हैं !!

वो बिखरी जुल्फो का मौसम रातो में मुझे जगाता हैं !
वो आँखों का काला काजल रह-रह कर क्यों तड़पता हैं !
जब से तुमसे दूर हुए एक पल चैन नहीं मिल पाया है !
तुमने मुझको खोया-सो-खोया मैंने तो तुमको पाया हैं !!

एक-ओर उजाला छाया हैं एक-ओर बरसता साया हैं !
तुमने मुझको खोया-सो-खोया मैंने तो तुमको पाया हैं !!

3 Comments

  1. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 11/07/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 11/07/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/07/2016

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