|| कर्मों का गणित ||

जिन्दगी 4

चहुँ ओर रूदन है मचा हुआ , मानव तकदीर को रोता है |
दुःख की पीड़ा से हो अधीर , अँसुओं से नयन भिगोता है || 1 ||
बिन खोजे भी अगनित, ऐसे मानव जग में ऐसे मिल जाते हैं |
जीवन भर सतपथ पर चल कर भी, रोते रोते ही जाते हैं || 2 ||
दुष्कर्मी भी दुनियाँ में, हर सुख का भोग उठाते हैं |
अंतिम यात्रा में जाने वाले, जमकर अश्रु बहाते हैं || 3 ||
दुनियाँ में ऐसे भी, बहुत अबोध मिल जाते हैं |
बचपन में ही मातु-पिता को खोकर, दर-दर की ठोकर खाते हैं || 4 ||
ऐसे भी बचपन होते हैं , जो पिता को तस्वीर में पाते हैं |
जन्म से पूर्व ही खोकर साया, जीवन पथ पर पाँव बढाते हैं || 5 ||
जग में किसने है क्या खोया है, कौन इसे बतला सकता |
किसके मन में है क्या पीड़ा, है कौन इसे समझा सकता || 6 ||
किसकी लाठी टूटी बुढापे की, किसके सर से है उठा साया |
असमय किसने खोये अपने, गणना क्या कोई कर पाया || 7 ||
कोई सब कुछ पाकर भी, उपभोग नहीं कर पाता है |
कोई बिना कुछ पाए ही , जीवन का आनंद उठाता है || 8 ||
ऐसे मानव भी हैं जग में , जो पाते हुए भी पीड़ा घोर |
तनिक न होते हैं अधीर , मन को नहीं करते कमजोर || 9 ||
रामकृष्ण का कहना था, कष्ट शरीर को पाने दो |
ऐ मन तुम मस्ती में मगन रहो, आनन्द ह्रदय को पाने दो || 10 ||
इस सबके पीछे छिपे कारण को, मानव नहीं समझ पाता |
ईश्वर को दोषी ठहरा कर , किस्मत को धुन-धुन पछताता || 11 ||
यह नियम जगत का है कैसा , मानव इसे समझे कैसे |
अबूझ नहीं पहेली यह, यदि समझे मानव यह है जैसे || 12 ||
सुख दुःख: के पीछे, ईश्वर का हाथ नहीं कोई होता |
निज कर्म का मानव भागी है, कर्मों की गठरी है ढोता || 13 ||
दृष्टान्त बहुत हैं कथाओं में, कर्मों का नियम हैं बतलाते |
मानव न कभी कर्मों से मुक्त, रहस्य कर्म का बतलाते || 14 ||
ईश्वर न है सुख का दाता, न ही वह दुःख को देता है |
यह तो कर्मों का तराजू है, जो हल्का भारी होता है ||| 15 ||
सत्कर्म भारी होने पर, भोग सुखो का होता है |
दुष्कर्मों का होते ही हिसाब, मानव तकदीर को रोता है || 16 ||
सुख भी कर्मों से आता है, दुःख के भी अपने कारण हैं |
कर्मों से पृथक है कुछ भी नहीं, सुख-दुःख कर्मो के कारण हैं || 17 ||
है कथा पूंछा धृतराष्ट्र ने, मैं क्यों जग में जन्मांध हुआ |
क्या कर्म किया था मैंने जो , मेरे पुत्रों का नाश हुआ || 18 ||
किन कर्मों की गठरी ढोता हूँ , मैं पुत्रहीन अँधा लाचार |
मैंने ऐसे क्या कर्म किए , जो जीवन मेरा हुआ बेकार || 19 ||
कहते हैं उसे मिली दृष्टि, वह पूर्व जन्मों में झाँक सका |
अपने ही कर्मों के फल को , स्वयं ही वह आँक सका || 20 ||
पूर्व जन्म में उसने, इक पक्षी के सौ पुत्रों को मारा था |
वृक्ष को अग्नि समर्पित कर, नेत्र ज्योति को जारा था || 21 ||
पूर्व कर्म का फल , उसने वर्तमान में पाया था |
ईश्वर का इसमें कुछ भी नहीं, जो बोया था, वह पाया था || 22 ||
महाराज दशरथ पिता राम के, कर्म फल से वे भी बच न सके |
अंधे ऋषि के शाप से वे भी, मुक्त स्वयं को कर न सके || 23 ||
पुत्र वियोग में प्राण त्याग कर ही, वे शाप से मुक्त हुए |
राम सरीखे पुत्र के होते हुए भी, कर्म फल से न विमुक्त हुए || 24 ||
भगवान कृष्ण ने भी, व्याध के तीर से छोड़े प्राण |
गांधारी के शाप को सत्य किया, कर्म फल नियम को दिया नव त्राण || 25 ||
व्याध को दिया आश्वासन , इसमें तनिक न दोष तुम्हारा है |
मुझे तुमने मेरे पूर्व जन्म के, छल के कारण मारा है || 26 ||
कर्म जो मैंने किया था छल से, फल तो मुझको पाना था |
कर्म-फल से मुक्त कोई नहीं, यह तो जाने का बहाना था || 27 ||
गीता में स्वयं कहा प्रभु ने , जग में मेरा प्रिय कोंई नहीं |
न ही मुझे अप्रिय मुझे कोई, मेरा जग में है कोंई नहीं || 28 ||
स्वयं अपना उद्धार करो, आत्मा को श्रेष्ठ बनाओ तुम |
उत्थान सोपान पर रखो कदम, अपना कर्म स्वयं बनाओ तुम || 29 ||
मैंने पथ दिखलाया है, चलने का कर्म तुम्हारा है |
आप अपना उद्धार करो, प्रत्येक पथिक को मैंने तारा है || 30 ||
जग में प्राणी जो लेकर आता , वह उसके ही कर्म का खाता है |
शुभ अशुभ जो भी करता , खाते में लिख जाता है || 31 ||
हे मानव ! जो तुमने पाया है , वे कर्म तुम्हारे अपने हैं |
आज के उज्ज्वल कर्म ही, कल के भविष्य के सपने हैं || 32 ||
कर्मों के खाते में, जितना ही सत्कर्म का भाग अधिक होगा |
उतनी ही सुख शांति पाओगे, दुखों का उतना ही क्षय होगा || 33 ||
ईश्वर का कोई हाथ नहीं, कर्मों का अपना अलग नियम |
अपनी करनी से ही मानव, पाता है फल नित प्रति क्रम-क्रम || 34|
हे मानव ! नश्वर जगत में , आप अपना उद्धार करो |
उत्थान के पथ को तय करके, जीवन लक्ष्य साकार करो || 35 ||

8 Comments

  1. babucm C.m.sharma(babbu) 11/07/2016
    • अखिलेश प्रकाश श्रीवास्तव aklesh1960 11/07/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/07/2016
    • अखिलेश प्रकाश श्रीवास्तव aklesh1960 15/07/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 11/07/2016
    • अखिलेश प्रकाश श्रीवास्तव aklesh1960 15/07/2016
    • अखिलेश प्रकाश श्रीवास्तव aklesh1960 15/07/2016

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