|| जिंदगानी की कहानी ||

जिन्दगी 2

जिन्दगी

अजब है कहानी तेरी जिंदगानी, कभी देती खुशियाँ कभी दु:ख की निशानी |
खुशियों की मस्ती कभी जगमगाती, कभी बहते आंसू ग़मों की निशानी
किसी की खुशी न सदा साथ रहती, न रहता सदा साथ गम का अँधेरा |
दिवस – रात्रि जैसे बदलते समय पर, वैसे ही चलता है यह खेल तेरा ||२||
तेरे साथ होती जब खुशियों की मस्ती, समझता है मानव कि सब मैंने पाया |
नहीं जानता जिन्दगी की डगर पर, आएगा इक दिन ग़मों का भी साया ||३||
खुशियों की मस्ती है ढ़लती क्षणों में, बादल ग़मों के हैं जब गड़गडाते |
सूरमाओं की रूहें भी हैं कांप उठती, वक्त का फेर न हैं जान पाते ||४||
कल तक जो थे वक्त के शहनशा , ज़माने की ठोकर हैं आज खाते |
अजब खेल हैं तेरी दुनियां के मालिक, इक पल हंसाते हो इक पल रुलाते ||५||
किसी के घर में पड़ता है फांका , कोई व्यंजनों की है चटखार लेता |
किसी के जहाँ में सिसकता है बचपन, तो कोई खिलखिलाहट के आनन्द लेता ||६||
किसी के लिए है खुशी जिंदगानी, किसी के लिए है ग़मों का समंदर |
कोई है मगन मस्ती के नशे में, कोई गम छिपाए है सीने के अन्दर ||७||
कोई ईश्वर को है दोष देता , तो कोई है खुशियों की फ़रियाद करता |
किसी ने जवानी बिताई नशे में, बुढ़ापे में मालिक को है याद करता ||८||
संतों का कहना है यह जिंदगानी , शरीरों की यात्रा है पूरी कराती |
कर्मो के कटते ही बंधन हैं कटते, मानव को जहां से है मुक्ति दिलाती ||९||
शायर है कहते यह जिन्दादिली है, दार्शनिकों की है अपनी कहानी |
सभी चाहते इसका मर्म पकड़ना, पकड़ में न आती है यह जिंदगानी ||१०||
सब अपने अनुसार इसको बताते, कोई कह न पाता है इसकी कहानी |
जगत के रचयिता को जो जान पाया, वही कह सकता है इसकी कहानी ||११||
हे स्वामी जगत के, लिखी है तूने ही इसकी कहानी |
बस इतनी दया करना हे विधाता , जीवन प्रकाशित करे जिंदगानी||१२||

7 Comments

  1. babucm C.m.sharma(babbu) 10/07/2016
    • अखिलेश प्रकाश श्रीवास्तव aklesh1960 11/07/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/07/2016
    • अखिलेश प्रकाश श्रीवास्तव aklesh1960 15/07/2016
    • अखिलेश प्रकाश श्रीवास्तव aklesh1960 15/07/2016
    • अखिलेश प्रकाश श्रीवास्तव aklesh1960 15/07/2016

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