सिकवा-गिला

कल जब न तूं होगी, न तुझसे कोई सिकवा-गिला होगा,
बस तेरी यादों का एक बिखरा हुआ सिलसिला होगा,
दुनिया मजाक बनायेगी मेरा जब,
तेरे प्यार में गिरकर मुझमें न फिर से उड़ने का हौंसला होगा……………..!!

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  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 11/07/2016

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