गुनाह-ए-इश्क…

गुनाह-ए-इश्क तो आंखों ने की
मुआवज़ा दिल ने चुकाई है,
फरेबी जिस्म की क्या बात करें
यहाँ तो हुई रूह तक पराई है….

… इंदर भोले नाथ. ..

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/07/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 10/07/2016
  3. babucm C.m.sharma(babbu) 10/07/2016

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