बेख़ौफ़ ।


डर-डर के जीता था, हसीनों के साये से भी,
बेख़ौफ़ हो गया मैं, जब से प्यार हुआ तुम से..!

साया = परछाईँ;

बेख़ौफ़ = निर्भय;
मार्कण्ड दवे । दिनांकः २० जून २०१६.

8 Comments

  1. babucm C.m.sharma(babbu) 10/07/2016
    • Markand Dave Markand Dave 11/07/2016
  2. mani mani 10/07/2016
    • Markand Dave Markand Dave 11/07/2016
  3. सोनित 10/07/2016
    • Markand Dave Markand Dave 11/07/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 10/07/2016
    • Markand Dave Markand Dave 11/07/2016

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