‘तुम’

तुम पारस प्रस्तर हो जैसे,
छू तुमको सोना बन जाऊं .
तुम दीप बनो जगमग-जगमग,
मैं बाती बन जल जाऊं.

तेरा आना मेघ मल्हारों सा
तेरा जाना अश्रु धारों सा.
तेरा होना, संग है फूलों का,
ना होना, दर्द है शूलों का.
पदचाप सुनूं जब जब तेरी,
पा जीवन मैं उस पल जाऊं
तुम दीप बनो जगमग-जगमग,
मैं बाती बन जल जाऊं.

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/07/2016
    • Dr. Geeta Chauhan 11/07/2016
  2. babucm C.m.sharma(babbu) 10/07/2016
    • Dr. Geeta Chauhan 11/07/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 10/07/2016
  4. Dr. Geeta Chauhan 11/07/2016

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