सिन्दुर

सुबह -सुबह
सुर्योदय के समय
सिन्दुर की फूल
उसकी माँग में भर दो तो
हो जायेगी
पुरा जीवन के लिए तुम्हारा
और वह सिन्दुर पाने से ही
अपनी कपाल को सराहती है

हरे और लाल चुड़ीयाँ
हाथ में पहना दो तो
आनंद के साथ लेती है
खनकाती है चुड़ियाँ
और खनकाने की आवाज़ में
अपने ह्रदय की धुन
भुल जाती हैं

पायल पहनाने चाहो तो
पैर आगे कर देती है
उसे गुलामी की प्रतिक बोलने को
किसी को अधिकार नहीं देती
और वह एक चुटकी सिन्दुर से ही
अपना जीवन गुलाम कर देती है.

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  1. babucm C.m.sharma(babbu) 10/07/2016

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