ठहरे हैं कदम, रुके नहीं

“This is a motivational poem. The poem describes how a young, enthusiastic and courageous women reacted when she faced her biggest failure of life She was shaken and demoralised. But the passion of following childhood dream was much greater than any failure. So, the Never Say Die attitude of girl in that phase of failure is presented in form of poem.”

अभी ठहरे हैं कदम कुछ पल के लिए , रुके नहीं
इनको रोकने का साहस, तो खुद हममें भी नहीं

गिरते-पड़ते, कभी ये लड़खड़ाते
पर गिर कर उठने में , नहीं ये कतराते
क्यूंकि ठहरे हैं कदम कुछ पल के लिए, रुके नहीं

कैसा भी हो जीवन का सफर ,
बेखौफ ये चलते जाते हैं
क्यूंकि गड़गड़ाते आसमान तो हर किसी के जीवन में आते हैं
हो सकता है इस बीच
ठहर जाएँ कदम कुछ पल के लिए , पर रुकेंगे नहीं
अपने अंदर की लौ को, हम बुझने देंगे नहीं

उड़ना है आसमान में , ये तो हमने ठान ही लिया है
पर उड़ान का समय तय होना, अभी भी बकाया है
इस पहर लक्ष्य की चाह में,
राह बदल सकते हैं, मंजिल नहीं
क्यूंकि जज्बात वही हैं, उम्मीद नयी

सपने देखे हैं हमने , ऊँची उड़ान भरने के
और इसमें नहीं कोई गुनाह
आएं कैसे भी हो दुनिया में, जाएंगे वैसे जिसकी हमें है चाह

बनाए रखेंगे अपने साहस और आत्मविश्वास को,
क्यूंकि आज नहीं तो कल
पाना ही है, इन्हे अपनी मंजिल को

इस लिए जरूरी है समझना की ,
ठहरे है कदम कुछ पल के लिए तो कुछ गम नहीं,
बस इनको रुकने देंगे हम नहीं

3 Comments

  1. babucm babucm 30/08/2016
    • Anni 30/08/2016

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