आघात से……..मनिंदर सिंह “मनी”

मदमस्त था लफ्ज़ो के खेल में,
अंजान था लफ्ज़ो के प्रभाव से,
गर ख़ुशी बनते है किसी के चेहरे पर,
दर्द भी होता है लफ्ज़ो के आघात से,
छलनी हुआ, मेरे दोस्त का दिल,
सिर्फ हस्सी के लिए किये मजाक से,
उसकी हसी चुपी में बदल गयी,
लगा ऐसा खेल गया मैँ उसके जज्बात से,
फिर वो कुछ ऐसा कह गया,
पीड़ा से कराह उठा मैँ, अपनी की बात से,
आँखों से अश्रु टपक पड़े, सर झुक सा गया,
सीने लगा कहता, जिंदगी लुटा दू तुझ जैसे यार से,
सीखा मैंने यही, मजाक को उसकी हद में करो,
अच्छे रिश्ते टूट जाते है लफ्ज़ो के किये आघात से,

12 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/07/2016
    • mani mani 09/07/2016
    • mani mani 09/07/2016
  2. Rajeev Gupta RAJEEV GUPTA 09/07/2016
    • mani mani 09/07/2016
  3. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 09/07/2016
    • mani mani 09/07/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 09/07/2016
    • mani mani 09/07/2016
  5. sarvajit singh sarvajit singh 09/07/2016
    • mani mani 09/07/2016

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