मैँ महकशी हु……………मनिंदर सिंह “मनी”

मैँ महकशी, मैँ मदमस्त शराब हु,
रोटी खाने को नहीं, पर मैँ बेहिसाब हु,
किसी को पीटकर, कही कुछ बेचकर,
लिखा किसी का, उधारी का हिसाब हु,
नालियों में पड़ी, उल्टियों से सनी,
किसी माँ-बाप की प्यारी औलाद हु,
देर रात रास्ता देख रही, किसी पत्नी का,
उसका सब कुछ, एकलौता सुहाग हु,
बच्चों की उम्मीदे, उनकी मुस्कुराहट,
जाने कहाँ खोया ?, खुद में एक सवाल हु,
पीते थे कभी कभार, मुझे दवा समझ,
उजड़ते घरों के लिए आज बनी अभिशाप हु,
कभी ख़ुशी में, कभी गम में,
कभी थकावट मिटाने वाली आवाज़ हु,
बनाया भी इंसा ने, पीया भी भी इंसा ने,
और इंसा ही कह रहा मैँ उसका विनाश हु,
मैँ महकशी हु……………

22 Comments

  1. Rajeev Gupta RAJEEV GUPTA 08/07/2016
    • mani mani 08/07/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/07/2016
    • mani mani 08/07/2016
    • mani mani 08/07/2016
  3. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 08/07/2016
    • mani mani 08/07/2016
  4. Dr Chhote Lal Singh Dr Chhote Lal Singh 08/07/2016
    • mani mani 08/07/2016
    • mani mani 08/07/2016
  5. C.M. Sharma babucm 08/07/2016
    • mani mani 08/07/2016
  6. आनन्द कुमार ANAND KUMAR 08/07/2016
    • mani mani 08/07/2016
  7. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/07/2016
    • mani mani 08/07/2016
  8. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 08/07/2016
    • mani mani 09/07/2016
  9. sarvajit singh sarvajit singh 08/07/2016
    • mani mani 09/07/2016

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